बहुत से मनोवैज्ञानिको ने अपने-अपने सिद्धान्त प्रतिपादित किये जिनमे से आज हम एक सिंद्धांत को आपके सामने प्रस्तुत करेंगे ।
"आज हम हेनरी मर्रे के सिद्धांत को आपके सामने प्रस्तुत करेंगे जो इस प्रकार है।"
हेनरी मर्रे का सिद्धांत -:
व्यक्तित्व के कुछ सिद्धान्त ऐसे है जो यह मानते है कि प्रेरणा व्यक्ति में एक गत्यात्मक एवं निर्देशात्मक बल directing force होता है जो व्यक्ति को एक निश्चित व्यवहार करने के लिए प्रेरित करता है हेनरी मर्रे द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व का सिद्धांत जिसे व्यकितत्व का आवश्यकता सिद्धान्त कहा जाता है, एक ऐसा ही सिद्धान्त है। विशेष ढांचा जिसे उन्होंने personological system कहा है, के तहत उन्होंने व्यक्तित्व का एक सिद्धान्त विकसित किया है जिसे सारग्राही इसलिए कहा गया है क्योंकि इसमें हमे उन तथ्यों एवं cocepts की झलक मिलती है जिसे मर्रे ने अन्य सिद्धान्तों विशेषकर फ्रायड के व्यक्तित्व सिद्धान्त से लिया गया है। इस सिद्धांत को व्यकित्त्व का एक मौलिक सिद्धान्त इसलिए कहा गया है क्योंकि इसमें मर्रे के अपने विशेष concepts एवं विधि का वर्णन मिलता है जिसने कई महत्वपूर्ण शोधों को आमंत्रित भी किया है।
मर्रे द्वारा प्रतिपादित व्यक्तित्व के आवश्यकता सिद्धान्त में मानव व्यवहार के बारे में निम्नाकित पूर्वकल्पनाये की जाती है--
1-: मानव प्रकृति निरर्ध्र्यता determinism विवेकी तथा समस्तिथि की पूर्वकल्पना पर गंभीर रूप से आधारित होता है।
2:- मानव प्रकृति पूर्णतावाद holism, अपरिवरत्नशीलता unchangeabililty, आत्मनिष्ठता तथा proactivity की पूर्वकल्पनाये से साधारण रूप से प्रभावित होताहै।
नोट-: पेरसोनोलॉजी एक ऐसा पद है जिसे मर्रे ने व्यक्तित्व की जगह पर अपने सिद्धान्त में प्रयोग किया था। ऐसे पेरसोनोलॉजी से उनका तातपर्य मनोविज्ञान की एक ऐसी शाखा से था जो व्यक्ति के जीवन एवं उसे प्रभावित करने वाली घटनाओ का अध्ययन करता है। **
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