बुधवार, 18 जनवरी 2017

स्व प्रत्यक्षीकरण

Self perception
1-समस्या
2-परिचय
3-परिकल्पना
4-परिक्षण सामग्री
5-प्रयोग विधि
6 छात्र का विवरण
7-निर्देश
8-प्रयोग प्रक्रिया
9-निष्कर्ष

क्रमिक स्थिति वक्र

1 -क्रमिक स्थिति वक:- वाचीक अधिगम में क्रमिक स्थिति वक्र पर पृथक्कीकरण करक के प्रभाव का अध्यन करना
2-वाचीक अधिगम का परीचय:- वाचीक अधिगम के परिचय में हम उसकी विधि, परिभाषा , एव् प्रकार की व्याख्या करते है जैसा की चित्र में आपको मिल जायेगा
उसके बाद वाचीक अधिगम की सामग्री आती है
3-सामग्री:- इसमे आपको वाचीक अधिगम के प्रयोग में क्या क्या सामग्री का उपयोग होगा वो आपको लिखना होगा
4-प्रयोज्य परिचय- इसमे हम किन व्यक्तियों पर प्रयोग कर रहे है उनका नाम , लिंग, आयु, और शिक्षा का विवरण देना होता है
और इस प्रयोग को आप दो व्यक्तियों पर करेंगे तथा उनका विवरण देंगे
5- परिकल्पना -इसमे हम परिकल्पना लिखेंगे जो आपको चित्र में मिल जायेगा
6-प्रायोगिक सामग्री- इसमे हम प्रयोग में लगने वाली सामग्री को लिखेंगे
7-निर्देश-निर्देश में हम प्रयोज्य को निर्देश देंगे की उसे प्रयोग को कैसे करना है तथा वह उसी प्रकार उत्तर देगा
8-प्रायोगिक विधि- इसमे हम प्रयोग किस प्रकार कर रहे है उसे दर्शाना होता है
9-परिणाम-जो प्रोयोग करने पर हमें परिणाम मिला उसे लिखना होता है
10-निष्कर्ष-प्रयोग समाप्त होने के पश्चात जो परिणाम मिला तथा उस परिणाम से क्या निस्कर्ष निकला इसकी व्याख्या करते है

बुधवार, 11 जनवरी 2017

स्मृति

स्मृति:- स्मृति का तात्पर्य उससे होता है जो की रोज हम बहुत से कार्य करते है।
तथा उन्ही कार्यो के बीच हमे उन कार्यो को याद रखते है जो हमारे लिए जरुरी होता है।
हमारा दिमाग ये कैसे करता है।
हम जो याद रखना चाहते है।
आइये जानते है कुछ इसके बारे में,
दरअसल हम जो भी कार्य करते है रोजमर्रा के कार्यो में वह हमारे स्मृति पर याद रहता है
कहने का तात्पर्य यह है कि कोई भी चीज़ जो हमे जरुरी लगती है वह हम अपने दिमाग को साकेतिक कर उसे स्मृति में भण्डारित कर लेते है तथा जब उसकी हमे आवश्यकता होती है तो हम उसका पुनः स्मरण कर अपनी स्मृति में लाते है
शब्द स्मृति का अंग्रेजी रूपांतर memory है
जिसकी उत्पत्ति लैटिन शब्द के memoriya से हुई है,
जिसका तात्पर्य लंबी याददाश्त या व्यक्तिगत ऐतिहासिक लेखा से लिया गया है स्मृति एक मानसिक प्रक्रिया है जो समस्या समाधान , तार्किक चिंतन , कल्पना तथा निर्णयन  आदि मानसिक प्रक्रियाओं को आधार प्रदान करती है।
इन मानसिक प्रक्रिया द्वारा व्यक्ति अपने पूर्व अनुभूतियो या सीखी हुई बातो को वर्तमान चेतना में लाता है। किसी विषय सामग्री को सीखते समय स्नायुकोषों में संरचनात्मक परिवर्तन होते है जिन्हें स्मृति चिन्ह कहते है  स्मृति चिन्ह के निर्माण प्रक्रिया को ही स्मृति (धारणा )  कहते है धारणा के द्वारा ही व्यक्ति सीखी गयी सामग्री को अपनी चेतना में लाने में सफल होता है। कई मनोवैज्ञानिको ने अपनी परिभासाये व्यक्त की है-
Mc dougall (1958)-"स्मृति का तातपर्य स्मृति की घटनाओं और अनुभवों की कल्पना और इस तथ्य को पहचान लेना की वह अतीत के अनुभव से है"
Woodworth (1954)-"स्मृति को सीखी हुई वस्तुओ का सीधा प्रयोग माना है"।
स्मृती के प्रकार -
1-संवेदिक स्मृति
2-अल्पकालिक स्मृति
3-दीर्घकालिक स्मृति