स्मृति:- स्मृति का तात्पर्य उससे होता है जो की रोज हम बहुत से कार्य करते है।
तथा उन्ही कार्यो के बीच हमे उन कार्यो को याद रखते है जो हमारे लिए जरुरी होता है।
हमारा दिमाग ये कैसे करता है।
हम जो याद रखना चाहते है।
आइये जानते है कुछ इसके बारे में,
दरअसल हम जो भी कार्य करते है रोजमर्रा के कार्यो में वह हमारे स्मृति पर याद रहता है
कहने का तात्पर्य यह है कि कोई भी चीज़ जो हमे जरुरी लगती है वह हम अपने दिमाग को साकेतिक कर उसे स्मृति में भण्डारित कर लेते है तथा जब उसकी हमे आवश्यकता होती है तो हम उसका पुनः स्मरण कर अपनी स्मृति में लाते है
शब्द स्मृति का अंग्रेजी रूपांतर memory है
जिसकी उत्पत्ति लैटिन शब्द के memoriya से हुई है,
जिसका तात्पर्य लंबी याददाश्त या व्यक्तिगत ऐतिहासिक लेखा से लिया गया है स्मृति एक मानसिक प्रक्रिया है जो समस्या समाधान , तार्किक चिंतन , कल्पना तथा निर्णयन आदि मानसिक प्रक्रियाओं को आधार प्रदान करती है।
इन मानसिक प्रक्रिया द्वारा व्यक्ति अपने पूर्व अनुभूतियो या सीखी हुई बातो को वर्तमान चेतना में लाता है। किसी विषय सामग्री को सीखते समय स्नायुकोषों में संरचनात्मक परिवर्तन होते है जिन्हें स्मृति चिन्ह कहते है स्मृति चिन्ह के निर्माण प्रक्रिया को ही स्मृति (धारणा ) कहते है धारणा के द्वारा ही व्यक्ति सीखी गयी सामग्री को अपनी चेतना में लाने में सफल होता है। कई मनोवैज्ञानिको ने अपनी परिभासाये व्यक्त की है-
Mc dougall (1958)-"स्मृति का तातपर्य स्मृति की घटनाओं और अनुभवों की कल्पना और इस तथ्य को पहचान लेना की वह अतीत के अनुभव से है"
Woodworth (1954)-"स्मृति को सीखी हुई वस्तुओ का सीधा प्रयोग माना है"।
स्मृती के प्रकार -
1-संवेदिक स्मृति
2-अल्पकालिक स्मृति
3-दीर्घकालिक स्मृति
ये Blog psychology के topic को हिन्दी मे समझाता हैइस blog मे KASHI Vidhyapith University के Psychology (syllabus) विषय को हिन्दी मे समझाने का प्रयास करता है
बुधवार, 11 जनवरी 2017
स्मृति
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